CG रेरा की बड़ी कार्रवाई: पंजीयन से पहले प्लॉट बेच रही थी गोदरेज प्रॉपर्टीज, 10 लाख का जुर्माना; बुकिंग और मार्केटिंग पर रोक


रायपुर, 13 जून 2026। छत्तीसगढ़ रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (CGRERA) ने राजधानी रायपुर के सेजबहार क्षेत्र में विकसित किए जा रहे एक रेसिडेंशियल प्लॉटिंग प्रोजेक्ट को लेकर बड़ी कार्रवाई की है। प्राधिकरण ने रेरा पंजीयन कराए बिना प्रोजेक्ट का प्रचार-प्रसार और बुकिंग शुरू करने के मामले में गोदरेज प्रॉपर्टीज पर 10 लाख रुपए का जुर्माना लगाया है। साथ ही स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वैध रेरा पंजीयन प्राप्त होने तक परियोजना की बुकिंग, बिक्री, विज्ञापन और मार्केटिंग पर पूर्ण रोक रहेगी।

पंजीयन से पहले ही शुरू कर दी थी बुकिंग

रेरा की जांच में सामने आया कि सेजबहार क्षेत्र में प्रस्तावित प्लॉटिंग परियोजना का रेरा में पंजीयन नहीं कराया गया था। इसके बावजूद कंपनी की ओर से संभावित ग्राहकों से 50 हजार रुपए तक टोकन एवं बुकिंग राशि ली जा रही थी।

ग्राहकों को बताया जा रहा था कि रेरा पंजीयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें प्लॉट की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी, साइट विजिट कराई जाएगी और पसंदीदा प्लॉट का चयन होने पर शेष राशि जमा कराकर आवंटन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सोशल मीडिया पर किया जा रहा था प्रचार

जांच के दौरान प्राधिकरण ने पाया कि प्रोजेक्ट का प्रचार सोशल मीडिया सहित विभिन्न माध्यमों से किया जा रहा था। परियोजना से संबंधित जानकारी, आकर्षक ऑफर और बुकिंग संबंधी संदेश सार्वजनिक रूप से साझा किए जा रहे थे, जिससे लोगों को निवेश के लिए प्रेरित किया जा रहा था।

रेरा के अनुसार, रेरा अधिनियम के तहत किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का पंजीयन होने से पहले उसका विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री करना नियमों का उल्लंघन है।

रेरा ने जारी किया प्रतिबंधात्मक आदेश

CGRERA ने अपने आदेश में कहा है कि जब तक परियोजना का वैध रेरा पंजीयन नहीं हो जाता, तब तक कंपनी किसी भी प्रकार की बुकिंग, बिक्री, विज्ञापन या मार्केटिंग गतिविधि नहीं करेगी।

प्राधिकरण ने चेतावनी दी है कि आदेश की अवहेलना किए जाने पर संबंधित प्रावधानों के तहत और अधिक कठोर कार्रवाई की जा सकती है।

निवेशकों को दी गई अहम सलाह

रेरा ने आम नागरिकों और निवेशकों से अपील की है कि किसी भी आवासीय, प्लॉटिंग या हाउसिंग प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले उसका रेरा पंजीयन अवश्य जांच लें।

रेरा पोर्टल पर परियोजना की स्वीकृतियां, प्रमोटर की जानकारी, कानूनी दस्तावेज और अन्य महत्वपूर्ण विवरण उपलब्ध रहते हैं। इनकी जांच कर निवेशक वित्तीय जोखिम और संभावित विवादों से बच सकते हैं।

क्या कहता है रेरा कानून?

रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 के तहत किसी भी रियल एस्टेट परियोजना का विज्ञापन, मार्केटिंग, बुकिंग या बिक्री शुरू करने से पहले उसका रेरा पंजीयन अनिवार्य है।

यदि कोई प्रमोटर या डेवलपर इस नियम का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ आर्थिक दंड सहित अन्य कानूनी कार्रवाई का प्रावधान है।

तीन दिन पहले 595 बिल्डरों को भेजा गया था नोटिस

गौरतलब है कि इससे पहले CGRERA ने प्रदेश के 595 प्रमोटरों और बिल्डरों को नोटिस जारी किया था। जांच के दौरान राज्यभर में 989 ऐसे आवासीय एवं हाउसिंग प्रोजेक्ट चिन्हित किए गए, जो पूरी तरह विकसित हो चुके हैं, लेकिन वहां के निवासियों को अब तक कॉमन एरिया और अन्य सामुदायिक सुविधाओं का अधिकार नहीं सौंपा गया है।

रेरा के अनुसार कई परियोजनाओं में अब तक रहवासी सोसायटी या एसोसिएशन का गठन नहीं किया गया है। वहीं अनेक जगहों पर पार्क, सड़क, ओपन स्पेस, कम्युनिटी हॉल और अन्य साझा सुविधाएं लोगों को हस्तांतरित नहीं की गई हैं।

इस संबंध में सभी प्रमोटरों और बिल्डरों से 15 दिनों के भीतर जवाब मांगा गया है। निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं मिलने पर रेरा अधिनियम 2016 के तहत कार्रवाई की जाएगी।

रेरा की सख्ती से बढ़ेगी पारदर्शिता

रेरा की इस कार्रवाई से रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी। साथ ही निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और बिना वैधानिक अनुमति के परियोजनाओं का प्रचार-प्रसार करने वाले डेवलपर्स पर अंकुश लगेगा।

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